मेरे सनकी अरबपति बनने से पहले

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अध्याय 61

समर की नज़र से

घंटी बजी। मैंने अपनी उत्तर-पुस्तिका पर आख़िरी अंक जल्दी-जल्दी लिखा और पेंसिल छोड़ दी—दिल अब भी तेज़ धड़क रहा था।

हो गया। सच में हो गया।

मैंने काँपती उँगलियों से अपना सामान समेटा—पेंसिलें, रबर, कैलकुलेटर। होंठों पर खिंचती मुस्कान मैं रोक ही नहीं पाई। सुबह वाली मिस थॉम्पसन की तीख...

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